World Record made by the Bugusaraiyan

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बेगूसराय के लाल का दस वर्षों में भी नहीं तोड़ा जा सका रिकार्ड।

बेगूसराय की धरती ने ऐसे दर्जनों सपूतों को जनम दिया है जिसके बनाए कीर्तिमान को तोड़ना संभव नहीं लग रहा।

बेगूसराय : बेगूसराय की धरती ने ऐसे दर्जनों सपूतों को जनम दिया है जिसके बनाए कीर्तिमान को तोड़ना दुनिया के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है। उसी में से एक नाम हिन्दी पट्टी के अंग्रेजी शिक्षक द्वारा बनाया गया विश्व रिकार्ड भी है। जिसे दस वर्षों बाद भी दुनिया का कोई व्यक्ति तोड़ नहीं पाया है। जिसका नतीजा है कि बेगूसराय के इस बेटे द्वार बनाए गए इंग्लिश ग्रामर को विश्?व के 120 देश मानने को मजबूर हैं। हम आपके लिए खोज कर लाए हैं बेगूसराय के उस लाल को, जिसे दुनिया इंग्लिश ग्रामर का किंग मानती है। परंतु, अपने जिला के ही अधिकतर लोगों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है।

पिता भी नहीं सोचे थे कि बेटा बनाएगा रिकार्ड

2005 में विश्व रिकार्ड बनाने वाले संजय कुमार सिन्हा का जन्म बेगूसराय शहर के डा. पी. गुप्ता रोड स्थित भारद्वाज नगर के एक टूटे से मकान में रहने वाले (मूल निवासी मटिहानी प्रखंड के छितरौर गांव) कैलाश प्रसाद सिन्हा और पुष्पलता देवी के घर में आज से 38 वर्ष पूर्व हुआ था। वकालत के पेशा से जुड़े कैलश प्रसाद सिन्हा के चार संतानों में सबसे बड़ा बेटा संजय कुमार सिन्हा कभी विश्व रिकार्ड बनाएगा यह किसी ने सपने भी नहीं सोचा था। निम्न मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे संजय ने दुनिया को दिखा दिया कि मेहनत और लगन के आगे संसाधनों की कमी कभी कामयाबी में बाधा नहीं बन सकती। संजय के पिता कैलाश बेगूसराय सिविल कोर्ट में वकालत करते हैं जबकि उसका छोटा भाई राजीव कुमार एक कुरियर ब्वाय की हैसियत से काम करते हैं। उसकी माता पुष्पलता देवी घरेलू कामकाज करतीं हैं। संजय के पिता कैलाश प्रसाद बताते हैं कि बचपन में ही संजय को रेलवे में कार्यरत उसके चाचा गरीब दास सिन्हा अपने साथ गोरखपुर लेकर चले गए थे। संजय वहीं के एक सरकारी स्कूल में दसवीं तथा एक कॉलेज से इंग्लिश में पीजी तक की पढ़ाई पूरी की।

कुछ अलग करने के जुनून ने बना दिया विश्वगुरु

बरौनी रिफाइनरी के डीएवी स्कूल प्रबंधन द्वारा इंग्लिश ग्रामर की स्पेशल क्लास के लिए बेगूसराय पहुंचे व‌र्ल्ड जीनियस रिकार्ड होल्डर संजय कुमार सिन्हा ने जागरण संवाददाता से लंबी बातचीत की। जिसमें उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से विश्व रिकार्ड तक के सफर की बातें बताई। संजय बताते हैं कि पढ़ने के दौरान ही नेपाल से आए एक प्रोफेसर उनके प्रश्नों से आश्चर्यचकित रह गए थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्?होंने संजय को नेपाल आमंत्रित किया। जहां त्रिभुवन विश्वविद्यालय में संजय ने इंग्लिश ग्रामर पर लेक्चर दिया। उनके पढ़ाने की शैली विवि प्रशासन को इतनी पसंद आई कि उसे रेगुलर लेक्चरर नियुक्त कर लिया। वहीं पर संजय की मुलाकात अमेरिकन और ब्रिटिश शिक्षक से हुई। जिसके बाद संजय को महसूस हुआ कि वह उनसे अच्छा कुछ कर सकता है। तब 2005 में संजय मुंबई पहुंचे। ?जहां पर उन्होंने 73 घंटे 37 मिनट तक बिना रुके 72 बच्चों को इंग्लिश ग्रामर पढ़ा विश्व रिकार्ड बनाया। इससे पहले यह रिकार्ड पोलैंड की एलिजाबेथ नाम की एक शिक्षिका के नाम था। जिसने 2003 में 59 घंटे बिना रुके 21 बच्चों को इंग्लिश ग्रामर पढ़ाया था।

विदेशों में भी है संजय की धूम अंग्रेजी ग्रामर में विश्व रिकार्ड बनाने के बाद से ही दुनिया के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थानें संजय को अपने यहां आमंत्रित करने को उतावले होने लगे। जिसके बाद संजय ने सर्वप्रथम लंदन के किंग्स कॉलेज में अपना पहला विदेशी लेक्चर दिया। उसके बाद से ही वह विश्व के अलग अलग विश्वविद्यालय में घूम-घूम कर लेक्चर देते हैं। संजय ने लंदन में एक और कीर्तिमान स्थापित करते हुए सबसे तेज अंग्रेजी पढ़ाने का रिकार्ड भी अपने नाम करने में कामयाबी हासिल की है।

विदेशी स्कूलों में चलती है संजय की इंग्लिश ग्रामर यूं तो संजय ने बहुत सारी पुस्तकें लिखीं हैं, परंतु, उसमें से कुछ पुस्तकें विदेशी स्कूलों के सिलेबस में शामिल हैं। जिसमें क्राउंस ग्रामर अमेरिका के सरकारी स्कूलों में चलाया जा रहा है। संजय की सबसे महत्वपूर्ण किताब किग्स ग्रामर्स, क्वींस ग्रामर्स, ¨प्रस ग्रामर्स, ¨कग्?स कॉम्निकेटिव इंग्लिश, किग्स लिट्रेचर सीरीज आदि प्रमुख हैं। संजय इस बात से दुखी हैं कि उनकी प्रतिभा को विदेशियों ने तुरंत पहचान लिया। जबकि अपने देश में वे अब तक बेगाने हैं। वह स्वामी विवेकानंद की मिसाल देते हुए कहते हैं उनकी प्रतिभा का लोहा भी देशवासियों ने तभी माना जब उन्होंने शिकागो में अपनी प्रतिभा का जौहर दिखाया था।

अमिताभ बच्चन के भी बने हैं मेहमान संजय को भले अपने जिले और अपने सूबे में कोई पहचान न मिल सकी हो, परंतु, जब उन्होंने विश्व रिकार्ड बनाया था तो अमिताभ बच्चन ने भी संजय को अपने घर मेहमान बनाया था। अमिताभ बच्चन संजय को अपने साथ डिनर के लिए आमंत्रित किए थे। बाद में उन्होंने अपने हाथों से उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। इसके अलावा कई और बड़ी हस्तियों के हाथों भी संजय सम्मानित हो चुके हैं।

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