Lone Purnia woman e-rickshaw driver braves catcalls for life of dignity

कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। इस लाइन से तो आप ज़रूर वाक़िफ़ होंगे।
लेकिन वास्तविक जीवन में लोग इसपर कितना अमल करते है यह एक बड़ी चुनौती है।
 
आइए हम आपको ऐसी ही एक सक्सियत से रु बरु कराते हैं।
 
ये है सोनी देवी, पूर्णिया, बिहार से। जहाँ महिलायें आज भी घर से नहीं निकलती या बाहर जाने में संकोच करती है या उन्हें निकलने नहीं दिया जाता उसी जगह सोनी देवी साड़ी पहने भारतीय संस्कृति को दर्शाते हुए e-rickshaw चलतीं हैं।
पूर्णिया के गुलाब बाग़ से हरदा रोड क्रॉसिंग पर ये e-rickshaw चलाती हैं साथ ही अपने पति वशिष्ठ चौधरी के चाय दुकान चलाने में भी मदद करती हैं। श्री चौधरी को अपनी पत्नी पर बहुत ही गर्व है और उन्होंने अपनी बच्ची को इंग्लिश मीडीयम स्कूल में दाख़िला दिलवाया है, इनके ३ बच्चें हैं २ लड़की और एक लड़का।
सोनी देवी पिछले ६ महीने से e-rickshaw चला रहीं हैं। e-rickshaw चलना इन्होंने चेन्नई में सिखा जहाँ ये अपने पति के साथ ३ साल रही थीं। इन्होंने लोन पे e-rickshaw लिया और समय पर किस्त भी भरती है।
इनके बच्चे इन दोनो की सबसे पहली प्राथमिकता है।
सोनी का सभी महिलाओं के लिए संदेश है की महिलायें आत्म निर्भर बने और सही काम में कोई संकोच  ना करें।
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