Kabar Lake, Begusarai

Kabar Lake, Begusarai

Kabar Lake, Begusarai

क़ाबर झील बेगुसराय, बिहार।

क़ाबर झील (Kabar Lake, Begusarai) ऐशिया का सबसे बड़ा शुद्ध पानी का झील है। जहाँ गरमियों के दिनों में सायबीरीयन पक्षियाँ अपना बसेरा बनाने आती है। यह लगभग भरतपुर अभयारण्य से ३ गुना बड़ा है। कहा जाता है कि क़रीब 60-100 प्रजाति की पक्षियाँ यहाँ अपना बसेरा बनाती है जो बेगुसराय वासियों के लिए गर्व की बात है।

लेकिन अब ऐसा नहीं है, ना ही तो यहाँ कोई झील है और् ना ही कोई पक्षी अब यहाँ अपना बसेरा बनाती है, और इसके ज़िम्मेदार है ख़ुद हम। कुछ पैसों की लालच के लिए हम उन पक्षियों को मारने लगे, कुछ लोग इसे बेचने कि लिए तो कुछ लोग इसे खाने के लिए। पक्षियों को मारने के लिए पानी में अत्यधिक मात्रा में रसायन मिलाने से पक्षियाँ तो मरी ही साथ में पानी के और् भी जीव मछलियाँ आदि भी मारने लगी, साथ ही गाँव के लोगों का झील के आस पास के क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना इस झील के अंत का कारण बना।

साथ ही प्रशासन का भी इस ओर ज़रा भी ध्यान नहि है। यह बेगुसराय का एक मात्र ऐसा धरोहर था और शायद अब भी है जो बेगुसराय को एक अच्छे पर्यटक स्थल का दर्जा दिला सकता है। लेकिन ना हम, हमारा समाज और प्रशासन इस बारे में सोचते है। जहाँ कुछ भी नहीं है वो अफ़सोस करते है, और जहाँ है उसकी लोग क़द्र नहीं करते। शायद माँ जयमंगला की कृपा से फिर से वो दिन वापस आ जाए और हमें हमारा खोया हुआ धरोहर वापस मिल जाए।

हो सके तो इसे इतना Share कीजिए ताकि हमारी बात हमारी सरकार तक पहुँचे और हमें पूरा विश्वास है की हमारी बातों पर वो ज़रा सा भी ध्यान ज़रूर देंगे और बूँद-बूँद से ही तो घड़ा भरता है। शायद हमें अपना खोया हुआ बेशक़ीमती धरोहर हमें वापस मिल जाए। जय बेगुसराय, जय बिहार, जय भारत!

Kabar Lake, Begusarai

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2 thoughts on “Kabar Lake, Begusarai

  1. Suman kumar Reply

    अफसोस की बात है झिल का अस्तित्वमिटता जा रहा है, बचपन मे हमे याद है जब हम पिकनिक मनाने आया करते थे कांवर झिल के किनारे, प्रशासन को जागरूक करने की जरूरत है, बेगूसराय की इस एकमात्र पर्यटन केंद्र को फिर से पुनर्जीवित करना होगा।

    • Begusarai Rocks Post authorReply

      जी बिलकुल प्रशासन को जागरूक करने की ज़रूरत है। बेगुसराय का यह एक मात्र सबसे ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल है। हम भी कई सालों तक यहाँ पिकनिक मनाने जाया करते थे लेकिन जब से झील सुख गया, पक्षियों का दिखना बंद हो गया तब से बस माँ जयमंगला की पूजा और दर्शन करने ही जाते है बस।

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