क़ाबर झील बचाने को चलेगा बड़ा अभियान- सहयोग करे अपने धरोहर को बचाने में

Begusarai-Kawar Lake

क़ाबर झील (Kabar Lake, Begusarai) ऐशिया का सबसे बड़ा शुद्ध पानी का झील है। जहाँ गरमियों के दिनों में सायबेरियन पक्षियाँ अपना बसेरा बनाने आती है। यह लगभग भरतपुर अभयारण्य से ३ गुना बड़ा है। कहा जाता है कि क़रीब 60-100 प्रजाति की पक्षियाँ यहाँ अपना बसेरा बनाती है जो बेगुसराय वासियों के लिए गर्व की बात है।

लेकिन अब ऐसा नहीं है, ना ही तो यहाँ कोई झील है और् ना ही कोई पक्षी अब यहाँ अपना बसेरा बनाती है, और इसके ज़िम्मेदार है ख़ुद हम। कुछ पैसों की लालच के लिए हम उन पक्षियों को मारने लगे, कुछ लोग इसे बेचने कि लिए तो कुछ लोग इसे खाने के लिए। पक्षियों को मारने के लिए पानी में अत्यधिक मात्रा में रसायन मिलाने से पक्षियाँ तो मरी ही साथ में पानी के और् भी जीव मछलियाँ आदि भी मारने लगी, साथ ही गाँव के लोगों का झील के आस पास के क्षेत्र पर क़ब्ज़ा करना इस झील के अंत का कारण बना।

साथ ही प्रशासन का भी इस ओर ज़रा भी ध्यान नहि है। यह बेगुसराय का एक मात्र ऐसा धरोहर था और शायद अब भी है जो बेगुसराय को एक अच्छे पर्यटक स्थल का दर्जा दिला सकता है। लेकिन ना हम, हमारा समाज और प्रशासन इस बारे में सोचते है। जहाँ कुछ भी नहीं है वो अफ़सोस करते है, और जहाँ है उसकी लोग क़द्र नहीं करते। शायद माँ जयमंगला की कृपा से फिर से वो दिन वापस आ जाए और हमें हमारा खोया हुआ धरोहर वापस मिल जाए।

हो सके तो इसे इतना Share कीजिए ताकि हमारी बात हमारी सरकार तक पहुँचे और हमें पूरा विश्वास है की हमारी बातों पर वो ज़रा सा भी ध्यान ज़रूर देंगे और बूँद-बूँद से ही तो घड़ा भरता है। शायद हमें अपना खोया हुआ बेशक़ीमती धरोहर हमें वापस मिल जाए।

यह पोस्ट हमने क़रीब १ साल पहले डाली थी। आज यह जानकर ख़ुशी हुई की जल पुरुष नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह जी के नेतृत्व में ज़िला के बेशक़ीमती धरोहर को बचाने का अभियान चलाया जा रहा है

काबर झील व पक्षी विहार जैसे राज्य के अनमोल झील-ताल-तलैयों की श्रृंखला से परिपूर्ण इस बड़े भूभाग में लगातार कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। काबर साफ एवं सुंदर जल का झील है। इसकी बनावट प्राकृतिक एवं बेहतरीन है। क्षेत्र भ्रमण के दौरान काबर के उजड़ने के दर्द को भोग रहे स्थानीय लोगों की सामाजिक दशा-दिशा ठीक नहीं है। इन गरीब मछुआरों व दलितों की दशा में सरकार सुधार करे। इसके बिना काबर के विकास की बात बेइमानी है। इलाके को पर्यटन व तीर्थाटन के शिखर पर स्थानीय लोगों के सहयोग से सरकार ले जा सकती है।

उक्त बातें जल पुरुष के नाम से प्रसिद्ध राजेंद्र सिंह ने काबर झील परिक्षेत्र व पक्षी विहार के निरीक्षण के बाद आयोजित जन संवाद बैठक को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा, काबर के बीच रहने वाले मूल निवासी लगभग 500 मछुआरों, दलितों व महादलितों को आवास,अपनी जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तक नहीं है। सरकार इनके शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार व कम से कम पांच डिसमिल जमीन की गारंटी ले। जनसंवाद को संबोधित करते हुए जल पुरुष ने कहा, झील के विकास के लिए काबर को दो भागों में बांटकर समझना जरूरी है। कहा, लगभग 5000 हेक्टेयर अधिसूचित इस इलाके में से जल जमाव वाले वास्तविक झील का इलाका व खेती-बारी होने वाले इलाके की अलग-अलग पहचान कर सरकार इन्हें समान रूप से विकसित करे। इससे कोई विवाद भी नहीं होगा। इनको अलग-अलग कर समान रूप से विकसित करने की जरूरत है।

इसके लिए स्थानीय लोग लगातार बैठक कर कमेटी बनाएं जिसमें हमारी जब जरूरत होगी, हम सदैव उपस्थित रहेंगे। स्थानीय कमेटी द्वारा काबर झील व इलाके के ताल-तलैयों, जलाशयों के संरक्षण-संवर्धन के लिए लगातार प्रयास किया जाएगा। यहां से जाते ही मुख्यमंत्री से बात कर काबर के विकास के लिए उनसे आग्रह किया जाएगा। जनसंवाद में काबर के बीच बसे इन 500 गरीब, महादलित व मछुआरों के परिवार को काबर के परिंदों का दुश्मन नहीं मान उन्हें पक्षी व काबर के मित्र के रुप में पहचान व प्रशिक्षण देने, इनके द्वारा पर्यटकों को आकर्षित करने की ट्रेनिंग देने, इन परिवारों को चिह्नित कर काबर के विभिन्न इलाके में रोजगार व पहचान देने, काबर के वन्य जीवों की सुरक्षा व इसमें आने वाले जल का मुक्त आगमन की व्यवस्था होने एवं इन सभी समस्याओं के अलावा काबर को बचाने के लिए स्थानीय लोगों के सहयोग से जल्द ही बड़े अभियान
चलाने की सहमति बनी। इस अभियान में शामिल होने की स्वीकृति जल पुरुष ने दी।

दूसरी तरफ जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने रविवार को काबर परिक्षेत्र के हृदयस्थली माता जयमंगलागढ़ के मंदिर में दर्शन कर स्थानीय लोगों के साथ काबर इलाके की वनस्थली, पक्षी अभ्यारण्य, पशुओं, जलजमाव क्षेत्र, जल आगमन क्षेत्र आदि का गहन निरीक्षण व अन्वेषण किया। वहीं स्थानीय लोगों से इसमें होने वाले सुधार के संबंध में राय ली। उन्होंने स्थानीय किसानों से भी बात कर काबर के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव का आदान प्रदान किया। वहीं इसके विकास का भरपूर
सहयोग देने का आश्वासन दिया।

जय बेगुसराय, जय बिहार, जय भारत!

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